Wednesday, February 7, 2018





बलेकै आगो ताप्दछ :-

जति चलाख भय पनि , मृत्युले हात थाप्दछ
जस्लाई हेर्यो उतै देख्छु , बलेकै आगो ताप्दछ

दाउरा रहे सम्म मात्र , आगो बल्ने छ हो त्यहां
टाठो बाठो धुर्त मुर्ख , बलेकै आगो ताप्दछ

निभेको आगोमा दाउरा,थप्दैन किन हो यहां
मान्छेको आदतै यस्तो , बलेकै आगो ताप्दछ

सानो फिस्स देखे आगो,पानी हालि निभाउंछ
ठूलो हुर्को खोजी खोजी,बलेकै आगो ताप्दछ

 ताप्दा पोल्छ आगोले ,उस्लाई ख्याल छैन खै
शुन्य श्रवण वन्द नयन , बलेकै आगो ताप्दछ

यता आगो भुसुक्कै भो ,उता  हुर्र बले पछि
लाजै छैन घुमि फिरी , बलेकै आगो ताप्दछ ।
                              -०-

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